
भारतीय इतिहास कापुनर्लेखन
प्रामाणिक शोध, तथ्य और प्रमाणों के साथ सत्य की खोज — राष्ट्र की चेतना के लिए
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हमारी अपनी लाइब्रेरी से — रोज़ नया ज्ञान
महाभारत का मौर्य कालीन अभिलेखीय साक्ष्य
प्राचीन भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट ने अपनी प्रसिद्ध कृति 'आर्यभट्टीय' में पाई (π) का मान लगभग 3.1416 निकाला था और पृथ्वी की परिधि का बहुत ही सटीक आकलन किया था।
भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण से पूर्व उनके द्वारा ग्रहण किए गए अंतिम भोजन 'सूकरमद्दव' के संदर्भ में पालि ग्रंथों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर मुख्य रूप से किन दो अर्थों पर विद्वानों में चर्चा होती है?
पूरी सामग्री पढ़ें →सम्राट अशोक के धम्म शिलालेख और भारतीय पुरातात्विक महत्व
भारतीय इतिहास में सम्राट अशोक के शिलालेख मौर्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, प्राकृत भाषा और प्राचीन दर्शन के सबसे प्रामाणिक पुरातात्विक साक्ष्य माने जाते हैं।
महाभारत का मौर्य कालीन अभिलेखीय साक्ष्य
महाभारत का मौर्य कालीन अभिलेखीय साक्ष्य
यह तथ्य इस बात का द्योतक है कि प्राचीन भारतीय और चीनी दार्शनिक परंपराएं भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर विचारों के आदान-प्रदान में संलग्न थीं। ज्ञान की यह सार्वभौमिक धारा दर्शाती है कि मौलिक दार्शनिक सत्य और चिंतन प्रणालियाँ विभिन्न संस्कृतियों में आपसी संवाद के माध्यम से कैसे सुरक्षित और सम्मानित होती रही हैं।













