
महाभारत का मौर्य कालीन अभिलेखीय साक्ष्य
शोध - नटराज नचिकेता
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मैं सनातन समीक्षा का संस्थापक तथा इतिहास और पुरातत्व विषयों पर शोध एवं विश्लेषण करने वाला एक कंटेंट क्रिएटर हूँ। मेरा उद्देश्य प्रमाण आधारित इतिहास, पुरातात्विक साक्ष्यों और तथ्यपरक विश्लेषण के माध्यम से भारतीय सभ्यता, संस्कृति और सनातन परंपरा से जुड़े विषयों को सरल, प्रामाणिक और शोधपूर्ण रूप में प्रस्तुत करना है। मैं इतिहास, संस्कृति और समसामयिक विषयों पर जनजागरण के लिए निरंतर कार्यरत हूँ।
👁 प्रीव्यू पेजेस
महाभारत का मौर्यकालीन अभिलेखीय साक्ष्य भारतीय इतिहास, पुरातत्व एवं अभिलेख-विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शोधपरक कृति है। इस पुस्तक का उद्देश्य यह जानना है कि क्या मौर्यकाल में महाभारत का अस्तित्व अभिलेखीय एवं पुरातात्विक प्रमाणों के माध्यम से सिद्ध होता है। इस ग्रंथ में मौर्यकालीन अभिलेखों, शिलालेखों, मुद्राओं, पुरावशेषों, प्राचीन साहित्य तथा उपलब्ध पुरातात्विक साक्ष्यों का तुलनात्मक एवं आलोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक यह स्पष्ट करने का प्रयास करती है कि महाभारत केवल एक धार्मिक महाकाव्य नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की ऐतिहासिक स्मृति का भी महत्वपूर्ण स्रोत है, जिसकी प्राचीनता को विभिन्न अभिलेखीय प्रमाणों के आधार पर समझा जा सकता है। इस शोध में ऐतिहासिक तथ्यों को तर्क, प्रमाण एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिससे पाठक स्वयं उपलब्ध साक्ष्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन कर सकें। पुस्तक विशेष रूप से इतिहास, पुरातत्व, भारतीय संस्कृति, अभिलेख-विज्ञान तथा प्राचीन भारत के शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं जिज्ञासु पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। यह कृति भारतीय अतीत के अध्ययन में अभिलेखीय प्रमाणों की भूमिका को रेखांकित करते हुए महाभारत के ऐतिहासिक पक्ष पर एक नए विमर्श का द्वार खोलती है।
