सिंधु सभ्यता ही वैदिक सभ्यता थी?

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✍️ लेखक: Sanatan Samiksha Desk

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सनातन समीक्षा एक शोध-आधारित ई-बुक मंच है, जो भारत के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व, धर्म और संस्कृति से जुड़े विषयों पर प्रामाणिक, तथ्यों और शिलालेखीय/पुरातात्विक साक्ष्यों पर आधारित शोध-ग्रंथ पाठकों तक पहुँचाता है। हमारा उद्देश्य है — इतिहास को किंवदंतियों से…

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सिंधु-सरस्वती सभ्यता को हम अक्सर उसकी विशाल नगर-योजना, पक्की ईंटों, जल-व्यवस्था और व्यापार के लिए जानते हैं। लेकिन क्या इस सभ्यता के लोगों के धार्मिक अनुष्ठानों में अग्नि की भी कोई महत्वपूर्ण भूमिका थी? हरियाणा के कुणाल पुरास्थल से सामने आया एक पुरातात्विक साक्ष्य इस सवाल को बेहद महत्वपूर्ण बना देता है। यहाँ खुदाई में एक ऐसी संरचना मिली, जिसे शोधकर्ताओं ने पहले ‘Community Fire Altar’ कहा, लेकिन बाद में स्वयं लेखकों ने इसे अधिक सावधानी से ‘Fire-pit’ या ‘Agnikunda’ कहना बेहतर माना। यह संरचना लगभग 3000 से 2500 ईसा पूर्व के प्रारंभिक हड़प्पा काल से संबंधित बताई गई है। इसके भीतर राख, मिट्टी और एक विशिष्ट गोलाकार संरचना के प्रमाण मिले हैं। तो आखिर कुणाल में मिली यह संरचना क्या थी? क्या यह वास्तव में यज्ञकुंड था? क्या इससे हमें हड़प्पावासियों के अग्नि-संबंधी अनुष्ठानों के बारे में कोई ठोस संकेत मिलता है? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल, क्या अग्नि-आधारित धार्मिक परंपराओं की जड़ें परिपक्व हड़प्पा सभ्यता से भी पहले तक जाती हैं? इस PPT में हम कुणाल की इसी रहस्यमय संरचना और उससे जुड़े पुरातात्विक प्रमाणों को करीब से समझेंगे।

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